ISRO Spadex satellites de docking process completes pave the way for Indian space station.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार को कहा कि उसने स्पेडेक्स सैटेलाइट को डी-डॉक करने (अलग करने) का काम पूरा कर लिया है. इससे चंद्रमा की खोज, मानव अंतरिक्ष उड़ान और अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने जैसे भविष्य के मिशन के लिए रास्ता साफ हो गया है. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में उपग्रहों की सफल डी-डॉकिंग की घोषणा की.

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘स्पेडेक्स उपग्रहों ने अविश्वसनीय रूप से डी-डॉकिंग की प्रक्रिया को पूरा किया. इससे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्रयान 4 और गगनयान सहित भविष्य के महत्वाकांक्षी मिशनों के सुचारू संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा.’ उन्होंने इसके लिए इसरो की टीम को बधाई दी साथ ही कहा कि यह हर भारतीय के लिए खुशी की बात है.

16 जनवरी को सफलतापूर्वक किया गया था ‘डॉक’

स्पेडेक्स मिशन पिछले साल 30 दिसंबर को शुरू किया गया था, जब इसरो ने अंतरिक्ष में डॉकिंग प्रयोग का प्रदर्शन करने के लिए दो सैटेलाइट – एसडीएक्स01 और एसडीएक्स02 को कक्षा में स्थापित किया था. स्पेस डॉकिंग अंतरिक्ष में दो सैटेलाइट को जोड़ने की प्रक्रिया को कहते हैं. कई प्रयासों के बाद अंतरिक्ष एजेंसी ने 16 जनवरी को दोनों उपग्रहों को सफलतापूर्वक डॉक किया था.

बाद में एक बयान में इसरो ने कहा कि अनडॉकिंग के बाद उसने उपग्रहों के साथ आगे के प्रयोगों की योजना बनाई है. इसने एक बयान में कहा, ‘स्पेडेक्स उपग्रहों को 16 जनवरी 2025 को सफलतापूर्वक डॉक किया गया था. इसरो ने अब 13 मार्च, 2025 को सुबह 09:20 बजे (भारतीय समायानुसार) पहले ही प्रयास में स्पेडेक्स उपग्रहों को अनडॉक करने का महत्वपूर्ण अभियान पूरा कर लिया.’

उपग्रह अब स्वतंत्र रूप से कर रहे हैं परिक्रमा

अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि उपग्रहों को अलग करने (अनडॉकिंग) की प्रक्रिया 45 डिग्री के झुकाव के साथ 460 किलोमीटर की गोलाकार कक्षा में हुई. उपग्रह अब स्वतंत्र रूप से परिक्रमा कर रहे हैं और उनकी स्थिति सामान्य है. इसके साथ ही, इसरो ने अब गोलाकार कक्षा में ‘डॉकिंग’ और ‘अनडॉकिंग’ प्रोसेस सफलतापूर्वक पूरी कर ली है. भारत की 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन स्थापित करने की योजना है.

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